इस दोस्ती को कभी अलवीदा ना कहना
Posted on August 13, 2008
ऐसा दोस्त चाहीय जो हमे अपना मान सके,
जो हमारा दील को जान सके,
चल रहे हो हम तेज़ बारीश मे,
फीर भी पानी मे से आँसुओ को पहचान सके!!!!
ख़ुश्बू की तरह मेरी सांसो मे रेहना……
लहू बनके मेरी नसनस मे बेहना,
दोस्ती होती है रीस्तो का अनमोल गेहना………..
इसलीय इस दोस्ती को कभी अलवीदा ना कहना.
याद आए कभी तो आँखें बंद मत करना……………..
हम ना भी मीलें तो गम मत करना!!!!
जरूरी तो नही के हम नेट पर हर रोज़ मीलें
मगर ये दोस्ती का एहसास कभी कम मत करना…………………..
दोस्ती उन से करो जो नीभाना जानते हो……………
नफ़रत उन से करो जो भूलना जानते हो…………….
ग़ुस्सा उन से करो जो मनाना जनता हो………..
पयार उनसे करो जो दील लुटाना जानताहो………..
» Filed Under Featured
Comments
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.























